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Hindi Poem - एक सफर

कलम से “एक सफर ” देखे मैंने इस सफर में दुनिया के अद्भुत नज़ारे, दूर बैठी शोर गुल से यमुना को माटी में मिलते || की देखा मैंने इस सफर में..... केसरी को लुप्त होते रात्रि को रौद्र होते, की एक तारे को भी देखा आसमां में अकेले,  देते देखा साथ मेरे पहरे कब्रिस्तानों में || की देखा मैंने इस सफर में.... गूंजती हुई आवाजों को तरसे देखा राहों पर, काले अम्बर को भी देखा, रोते हुए मैंने राखो पर.. सन्नाटों को,अंधियारे को गाते देखा बादल को, वृक्षों को भी देखा मैंने गले लगाते तुफानो को || की देखा मैंने इस सफर में..... की ठहर गया पल भर के लिए समेटने सारी यादों को खींच क़र रखली तस्वीरें कुछ सुकून भरी उन सासों को, देते देखा ताल मधुर पानी के उन फुहारों को, नाचते देखा भैरव को, खलियानो को, उन बागों को, देखा मैने अंधियारे को उज्जवल उन प्रकाशो को || की देखा मैंने इस सफर में..... देखी मैंने खुशहाली उन सुखी हुई शाखों को , मुँह धोते उन बच्चो को लड़ते देखा सपनो को, सुलगती हुई अंगेठी को, धुलते देखा आँगन को, परिवारों को हँसते देखा, पहलवानो की उन ललकारो को || की देखा मैंने इस सफर में..... तां...

Hindi Poem - आत्मवाद

कलम से    आत्मवाद     इक   प्रश्न   मन   में   उठ   रहा  ,  कुछ   यूँ   है   मुझसे   पूछता ...   तुम   राग   क्या   अलापते  ?  तुम   व्यंग   क्यूँ   हो   साधते ?       क्यों   रूष्ट   हुए   मुझसे   बोलो  ?   क्यूँ   मौन   आज   तेरी   वाणी  ?   क्यों   इतना   मायूस   हुआ   तू  ?  क्यूँ   सूखा   मुँह   का   पानी ?   इक   प्रश्न   मन   में   उठ   रहा  ......   मै   बात   वहाँ   की   बतलाऊ  ,  जब   प्रश्न   ये   भीतर   आया   था  |   ऐसा   लग   रहा   था   मानो  ,  विष   से   तूने   मुझको   नहलाया   था  |   विचारो   का   संघर्ष   ये   कैसा  ?...