कलम से “एक सफर ” देखे मैंने इस सफर में दुनिया के अद्भुत नज़ारे, दूर बैठी शोर गुल से यमुना को माटी में मिलते || की देखा मैंने इस सफर में..... केसरी को लुप्त होते रात्रि को रौद्र होते, की एक तारे को भी देखा आसमां में अकेले, देते देखा साथ मेरे पहरे कब्रिस्तानों में || की देखा मैंने इस सफर में.... गूंजती हुई आवाजों को तरसे देखा राहों पर, काले अम्बर को भी देखा, रोते हुए मैंने राखो पर.. सन्नाटों को,अंधियारे को गाते देखा बादल को, वृक्षों को भी देखा मैंने गले लगाते तुफानो को || की देखा मैंने इस सफर में..... की ठहर गया पल भर के लिए समेटने सारी यादों को खींच क़र रखली तस्वीरें कुछ सुकून भरी उन सासों को, देते देखा ताल मधुर पानी के उन फुहारों को, नाचते देखा भैरव को, खलियानो को, उन बागों को, देखा मैने अंधियारे को उज्जवल उन प्रकाशो को || की देखा मैंने इस सफर में..... देखी मैंने खुशहाली उन सुखी हुई शाखों को , मुँह धोते उन बच्चो को लड़ते देखा सपनो को, सुलगती हुई अंगेठी को, धुलते देखा आँगन को, परिवारों को हँसते देखा, पहलवानो की उन ललकारो को || की देखा मैंने इस सफर में..... तां...
The pen is mightier than the sword if the sword is very short, and the pen is very sharp.